पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। वहां भूगर्भीय हलचल जिससे भूकंप का खतरा बना रहता है। ऐसे में अगर धरती के नीचे हलचल शुरू होते ही हमें इसका संकेत मिल जाए, तो हम समय रहते खुद को सुरक्षित कर सकते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब इस सवाल का जवाब खोजने के बेहद करीब है। इस खास प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के डॉ. रामजी द्विवेदी और (आइआइएसईआर) पुणे के डॉ. चंद्रकांत ओझा। [Dainik Jagran 30-03-2025, Page No. 01]
मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के पुरा छात्र शोधकर्ता कमल रुद्र नैनोशीट ट्रांजिस्टर तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। न्यूयार्क के आइबीएम रिसर्च में इस तकनीक पर काम कर रहे रुद्र के शोध का मुख्य उद्देश्य नैनोमीटर आकार के ट्रांजिस्टर विकसित करना है, जो भविष्य के चिप्स को तेज, शक्तिशाली और ऊर्जा-कुशल बनाएंगे। [Dainik Jagran 27-03-2025, Page No. 01]-B
मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में ‘‘हिंदी की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता एवं बौद्धिक विकास में भाषाई पोषण का महत्व’’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य हिंदी भाषा के बढ़ते महत्व, इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और बौद्धिक विकास में भाषाई पोषण की भूमिका को समझाना था। मुख्य अतिथि मुक्त विश्वविद्यालय की स्वास्थ्य विज्ञान शाखा के पूर्व निदेशक डॉ. गिरिजा शंकर शुक्ल ने हिंदी भाषा के एतिहासिक महत्व और आधुनिक दौर में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने की। [Dainik Jagran 27-03-2025, Page No. 04]-A
मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के विज्ञानियों ने एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जिससे खराब लिवर को ठीक किया जा सकेगा। इस तकनीक के तहत मेसेन्काइमल स्टेम सेल्स का उपयोग कर हेपेसाइट्स (लिवर की मुख्य कोशिकाएं) बनाने की प्रक्रिया अब आधे समय यानी केवल 14 दिनों में ही पूरी की जाती है। इस प्रक्रिया से लिवर की खराब कोशिकाओं को ठीक किया जा सकता है, जिससे भविष्य में लिवर के प्रत्यारोपण की आवश्यकता कम हो सकती है। इस शोध दल में एमएनएनआईटी प्रयागराज के निदेशक प्रो. आर. एस. वर्मा, आईआईटी मद्रास के संतोष गुप्ता, नार्वे के ओस्लो विश्वविद्यालय से डॉ. जोवाना विसेवेक सहित कई विज्ञानी शामिल हैं। प्रमुख शोधकर्ता और एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. आर. एस. वर्मा बताते हैं कि इस प्रक्रिया से तैयार लिवर का ढांचा एक प्राकृतिक ढांचे की तरह काम करता है, जिस पर स्टेम सेल को बढ़ाया जा सकता है। प्रो. आर. एस. वर्मा ने बताया कि शोध में लिवर ट्रांस्प्लांट के दौरान निकाले गए पुराने लिवर का उपयोग किया गया। लिवर से रक्त, कोशिका, टिशू का साफ कर बैक्टीरिया और वायरस से मुक्त किया गया और फिर स्टेम सेल व ग्रोथ फैक्टर डालकर कृत्रिम लिवर टिशू विकसित किया गया। वह कहते हैं कि यह शोध यकृत प्रत्यारोपण और पुनर्जीवन उपचार के लिए नई आशा है। लिवर फेल्योर, हेपेटाइटिस और अन्य यकृत रोगों के उपचार की प्रभावशीलता बढेगी और लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत कम होने से लाखों मरीजों को जीवनदान मिल सकता है। [Dainik Jagran 26-03-2025, Page No. 01]
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंड स्लाइड) से होने वाली जान माल की हानि को बचाने के लिए मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद ने इसरो के साथ मिलकर एक नए साफ्टवेयर की खोज किया है। यह सॉफ्टवेयर सेटेलाइट के डाटा का अध्ययन करके लैंड स्लाइड की संभावनाओं को तलाशने का काम करेगा। एमएनएनआईटी के क्षेत्रीय भू-गणित केंद्र के डॉ. रामजी द्विवेदी, इसरो के वैज्ञानिक डॉ. तापस राजन मार्धा और शोध छात्र विपिन मौर्या इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2018 से कार्य कर रहे हैं। डॉ. रामजी द्विवेदी ने बताया कि इसरो के साथ मिलकर एक सॉफ्टवेयर बना रहे हैं, जो सेटेलाइट के डाटा का अध्ययन कर लैंड स्लाइड के होने की संभावनाओं को तलाशेगा। [Amar Ujala 26-03-2025, Page No. 09]
जब इंसान कुछ करने की ठान ले, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया शिवानी मिश्रा ने, जो न सिर्फ खुद के लिए रास्ता बना रही हैं, बल्कि और भी कई महिलाओं को घर बैठे कमाने का मौका दे रही है। मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में आयोजित दो दिवसीय प्रयागराज स्टार्टअप समिट 2.0 में ऐसी कई कहानियां देखने और सुनने को मिली, जहां यंग इनोवेटर्स ने अपने शानदार और अनोखे आइडियाज पेश किए। इस समिट में सिर्फ शहर से ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से भी लोग स्टार्टअप्स लेकर पहुंचे थे। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने कुछ नए उद्यमियों से बात की और उनकी जबरदस्त जर्नी के बारे में जाना। [I Next 19-03-2025, Page No. 04]
इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट के छात्र वर्नाक्यूलर बिजनेस बॉट्स ऑन व्हाट्सएप नाम से चैटबॉट बना रहे हैं जो छोटे व्यवसायों के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है। खास बात यह स्टार्टअप स्थानीय भाषाओं में उत्तर देने में सक्षम होगा। यह चैटबॉट दुकानदार को यह भी बताएगा कि कौन सा सामान गोदाम में हैं या नहीं। एमएनएनआईटी में आयोजित समिट 2.0 में इस स्टार्टअप को दूसरा स्थान हासिल हुआ है। समापन समारोह में इस स्टार्टअप के लिए पचास हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। [Hindustan 19-03-2025, Page No. 04]
मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में स्टार्टअप समिट 2.0 में युवाओं ने अपने नवाचारी विचारों से प्रभावित किया। इस समिट का सबसे रोमांचक हिस्सा स्टार्टअप पिचिंग सत्र था, जिसमें युवा उद्यमियों ने अपने अनोखे विचार निवेशकों और मेंटर्स के सामने प्रस्तुत किया। 200 स्टार्टअप और नवाचारी विचारों की प्रस्तुति के बाद ओरल कैंसर के उपचार और रोकथाम के क्षेत्र में काम करने वाली मुक्ता एआई सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप बना जिसको एक लाख का पहला पुरस्कार मिला। [Dainik Jagran 19-03-2025, Page No. 04]
दो साल पहले चार लाख रुपये से स्टार्टअप शुरू किया था और आज कंपनी की मार्केट वैल्यू पांच करोड़ रुपये है। यह कहना है कुशीनगर के अंशुमान उपाध्याय को जो फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से किसानों को रोपाई के समय काला नमक चावल का निशुल्क बीज उपलब्ध कराते हैं। मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब एमएनएनआईटी फाउंडेशन द्वारा स्टार्टअप कंपनी कैशक्राई के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय स्टार्टअप समित 2.0 में आए अंशुमान ने अपने अनुभव साझा किए। [Amar Ujala 19-03-2027, Page No. 7 - B]
मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब एमएनएनआईटी फाउंडेशन द्वारा स्टार्टअप कंपनी कैशक्राई के सहयोग से आयोजित स्टार्टअप समित 2.0 में तीन सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप्स को पुरस्कृत किया गया। प्रथम पुरस्कार में एक लाख रुपये का चेक ओरल कैंसर (मौखिक कैंसर) की टीम मुक्ता को दिया गया। वहीं द्वितीय पुरस्कार में 50 हजार रुपये का चेक वर्नाक्यूलर बिजनेस बॉट्स ऑन व्हाट्सएप और तृतीय पुरस्कार 25 हजार रुपये का चेक कॉम्फी ईमोबिलिटी को मिला। दो दिनी समिट 2.0 का मंगलवार को समापन हो गया। [Amar Ujala 19-03-2027, Page No. 7 - A]